Ambedkarwad ki Roshni mein RSS ka Dwij Rashtravad; By Bhanwar Meghwanshi
By the author of the bestselling book 'Main Ek Karsevak Tha'
₹300.00
इस पुस्तक का प्रतिपाद्य विषय दो भागों में विभक्त है– पहला भाग विचार और कृत्य से जुड़ा है तो दूसरे भाग में आरएसएस के सौ साल के नेतृत्व का सिंहावलोकन है। परिशिष्ट रूप में समाविष्ट अंतिम भाग तथ्यान्वेषण है, जो विगत कई दशकों से आरएसएस द्वारा जन मानस में फैलाए गए है। पुस्तक के प्रतिपाद्य विषय का तीन-चौथाई से ज्यादा हिस्सा पहले भाग में है, जो यह साबित करता है कि पुस्तक का मूल विषय यही है। आरएसएस के द्विज राष्ट्रवाद को परखने के लिए लेखक ने तीन कसौटिया चुनी है– भारतीय संविधान (अध्याय 1), आरक्षण (अध्याय 3) और जाति (अध्याय 4)। इनको आंबेडकर की वैचारिकी से प्रतिपादित करते हुए विरोधाभाषी बताया गया है (अध्याय 2)। ये ही टकराव के महत्वपूर्ण बिंदु है, जिसका पुस्तक में विस्तार है।
