'तथ्य-आधारित पुस्तक'

पुस्तक की भाषा सरल, स्पष्ट, भावुक और आंदोलनकारी है। इस कारण यह बहुजन पाठकों तक आसानी से समझ में आने वाली है। ... उद्धरणों की भरमार (गोलवलकर, भागवत, राकेश सिन्हा आदि से) इसे तथ्य-आधारित बनाती है। वर्तमान चिंतन में यह अत्यंत प्रासंगिक है। - तारा राम, सामाजिक कार्यकर्ता व बहुजन विचारक, राजस्थान